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सोमनाथ से नालंदा तक: NCERT की नई किताब में इस्लामी आक्रमणों का कड़वा सच

जनवी, गौरी और खिलजी के हमलों पर मचा सियासी घमासान

जनवी, गौरी और खिलजी के हमलों पर मचा सियासी घमासान

देश की स्कूल शिक्षा में इतिहास पढ़ाने के तरीके में एक बड़ा बदलाव सामने आया है. NCERT की नई इतिहास पाठ्यपुस्तक में पहली बार मध्यकालीन भारत के उन अध्यायों को विस्तार से शामिल किया गया है, जिन्हें अब तक संक्षेप या तटस्थ भाषा में पढ़ाया जाता रहा. नई किताब में महमूद गजनवी से लेकर अलाउद्दीन खिलजी तक के शासनकाल के दौरान हुए मंदिरों, शहरों और शिक्षा केंद्रों के विनाश को स्पष्ट शब्दों में दर्ज किया गया है.

NCERT की नयी कक्षा-7 की सोशल साइंस किताब में गजनवी आक्रमणों (Ghaznavid invasions) को अब सिर्फ एक पैराग्राफ नहीं, बल्कि छह पेज में विस्तार से बताया गया है - जिसमें महमूद गजनवी द्वारा भारत पर 17 हमले, मथुरा, कन्नौज, सोमनाथ जैसे प्राचीन नगरों की लूट-पलट, विशाल मंदिरों का विध्वंस, असंख्य नागरिकों की हत्या और कई बच्चों तथा नागरिकों को बंदी बनाकर मध्य एशिया में गुलाम बाजारों में बेचा जाना शामिल है। इसके अलावा, 11वीं-12वीं सदी के अन्य आक्रमणों ( जैसे घुरिदों, कुतुब उद्दीन ऐबक, बख्तियार खिलजी आदि) का भी फोकस किया गया है, ताकि छात्रों को समझ आए कि भारत पर कितनी बार और किस तरह बाहरी आक्रमण हुए.

NCERT क्लास 7 इतिहास की पुरानी टेक्स्ट बुक में महमूद गजनवी पर एक पैराग्राफ था. इसमें बताया गया था कि शासकों ने बड़े मंदिर बनाकर अपनी शक्ति और संसाधनों का प्रदर्शन करने की कोशिश की और जब उन्होंने राज्यों पर हमला किया तो उन्होंने ऐसे मंदिरों को निशाना बनाया जो कभी-कभी बहुत अमीर थे. इसमें महमूद गजनवी का उल्लेख किया गया था कि उसने धार्मिक मकसद से उपमहाद्वीप पर 17 बार हमला किया और अमीर मंदिरों को निशाना बनाया और उनकी संपत्ति लूट ली.

'गजनवी आक्रमण' सेक्शन में बॉक्स और तस्वीरों सहित लगभग छह पेज हैं. इसमें भारत में महमूद के 17 अभियानों, मथुरा के एक मंदिर की लूट, कन्नौज के मंदिरों और गुजरात के सोमनाथ में सोमनाथ शिव मंदिर के विनाश का विवरण दिया गया है. यह स्टूडेंट्स को बताता है कि मौजूदा मंदिर 1950 में बनाया गया था और अगले साल भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने इसका उद्घाटन किया था. इसके बाद उनसे पूछा जाता है कि उन्हें क्यों लगता है कि इसका निर्माण पूरी तरह से पब्लिक डोनेशन से फंड करने का फैसला किया गया था.

ताजा सेक्शन में महमूद गजनवी के अभियानों का भी वर्णन करता है, जिसमें हजारों भारतीय नागरिकों का नरसंहार और बच्चों सहित कई कैदियों को पकड़ना शामिल था, जिन्हें मध्य एशिया के गुलाम बाजारों में बेचने के लिए ले जाया गया था. इसमें आगे कहा गया है कि उनके जीवनी लेखक उन्हें एक शक्तिशाली लेकिन क्रूर और निर्दयी जनरल के रूप में चित्रित करते हैं, जो 'न केवल काफिरों' (यानी, हिंदुओं या बौद्धों या जैनों) का नरसंहार करने या उन्हें गुलाम बनाने के लिए उत्सुक था, बल्कि इस्लाम के प्रतिद्वंद्वी संप्रदायों के मानने वालों को भी मारने के लिए उत्सुक था."

काफिरों को मारा, संपत्ति पर कब्जा 

महमूद गजनबी के दरबारी इतिहासकार अल-उत्बी के हवाले से कहा गया है कि उन्होंने काफिरों को मारा और उनके बच्चों और मवेशियों को लूट के माल के रूप में ले गए, कई अन्य क्षेत्रों पर कब्जा किया, और उनके मंदिरों, उनकी पवित्र इमारतों को नष्ट कर दिया, इसके बजाय मस्जिदें बनवाईं, जिससे इस्लाम की रोशनी दिखाई दे. 

वहीं, अल-बिरूनी के हवाले से कहा गया है कि उन्होंने सोमनाथ मंदिर में पूजे जाने वाले शिवलिंग की उत्पत्ति की ओर इशारा किया और राजकुमार महमूद ने उसे नष्ट कर दिया था. उसने ऊपरी हिस्से को तोड़ने और बाकी हिस्से को अपने निवास, गजनी ले जाने का आदेश दिया. मूर्ति का एक हिस्सा, गजनी की मस्जिद के दरवाजे के सामने पड़ा है. 

एनसीईआटी की सातवीं क्लास की पुस्तक के चैप्टर 'बदलते ज्वार: 11वीं और 12वीं शताब्दी' फिर मुहम्मद गोरी का जिक्र है क्षेत्रीय स्तर पर विजय हासिल करना चाहता था. यह उसके जनरल कुतुब-उद-दीन ऐबक और ऐबक के सेना कमांडर बख्तियार खिलजी की ओर इशारा करता है, जिन्होंने 12वीं शताब्दी के अंत से पूर्वी भारत में अभियान चलाए.

नालंदा और विक्रमशिला विश्वविद्यालयों को किया नष्ट 

बंगाल जाते समय, उसने नालंदा और विक्रमशिला जैसे बड़े बौद्ध मठों और विश्वविद्यालयों को नष्ट कर दिया, भारी लूटपाट की और बड़ी संख्या में भिक्षुओं का कत्ल किया. बौद्ध धर्म के इतिहासकारों में इस बात पर सहमति है कि सीखने के इन बड़े केंद्रों के विनाश ने भारत में बौद्ध धर्म के पतन को तेज किया, हालांकि कुछ अन्य कारक भी इसमें भूमिका निभा सकते हैं," यह नालंदा पर खिलजी के हमले का विस्तार से बताने से पहले कहता है, जहां "कहा जाता है कि पुस्तकालय महीनों तक जलता रहा."

NCERT के निदेशक दिनेश सकलानी ने कहा कि सामग्री खुद ही सब कुछ स्पष्ट करती है. गजनवी आक्रमणों पर अध्याय से पहले 6वीं से 10वीं शताब्दी के साम्राज्यों और राज्यों पर एक अध्याय है. कन्नौज, कश्मीर, चालुक्यों, राष्ट्रकूटों, पल्लवों और चोलों के शासकों को कवर करते हुए, यह मध्य एशिया के हूणों और अरबों द्वारा विदेशी आक्रमणों पर एक अनुभाग के साथ समाप्त होता है.

मुहम्मद बिन कासिम का जिक्र 

यह मुहम्मद बिन कासिम के आगमन की ओर इशारा करता है जिसे इराक के गवर्नर ने सिंध भेजा था. यह 13वीं सदी के एक फारसी रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा गया है कि बिन कासिम ने इस धार्मिक युद्ध को करना अपना कर्तव्य समझा, ईश्वर की आज्ञा का पालन करते हुए जो कुरान में कहते हैं,  "काफिरों के खिलाफ युद्ध करो." इसमेंस सिंध के एक शासक राजा दाहिर की हत्या का उल्लेख है. इसमें काफिर शब्द की व्याख्या भी शामिल है. मध्यकालीन इस्लाम के लिए, काफिर गैर-मुस्लिम थे, खासकर हिंदू, बौद्ध या जैन, किताब बताती है.

सिंध पर अरब आक्रमण 

सिंध पर अरब आक्रमण और मुहम्मद बिन कासिम पुरानी क्लास 7 की इतिहास की किताब का हिस्सा नहीं थे. NCERT नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क फॉर स्कूल एजुकेशन 2023 के हिसाब से नई स्कूल टेक्स्टबुक ला रहा है. अब तक क्लास 1 से 8 तक की नई किताबें उपलब्ध हैं. पहले के सालों में, क्लास 7 में सोशल साइंस की तीन टेक्स्टबुक होती थीं, जिसमें इतिहास, सामाजिक और राजनीतिक जीवन, और भूगोल के लिए एक-एक किताब थी. नई किताबों के साथ, क्लास 7 के छात्र दो टेक्स्टबुक इस्तेमाल करेंगे, जिनमें से हर एक में तीनों थीम शामिल होंगी.

Bindass Bol Dil Se

Written by: Dhirendra Mishra

08 Dec 2025 (Published: 10:22 IST)